पुकार
पुकार न कोई खिलौना है, न कोई अपना है, मेरा तो एक ही सपना है।। आए एक दिन ऐसा, जाऊं स्कूल मालिक के बेटे जैसा।। अभी तो हाल यही है, बिन जूते की सर्दी, मास्टर की छड़ी है।। घर का सारा काम करवाती है, मालकिन राजा बेटे को बादाम खिलाती है।। न कोई दिवाली है, न कोई होली है, ...